डचों का भारत में आगमन | Advent of the Dutch in India in Hindi


डच कौन थे?


डच लोग या डच नीदरलैंड्स के मूल निवासी एक जर्मन जातीय समूह हैं। वे एक सामान्य संस्कृति साझा करते हैं और डच भाषा बोलते हैं।

भारत में डच ईस्ट इंडिया कंपनी:


डच ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना 1602 ई. में डच संसद के द्वारा इस कम्पनी को 21 वर्षो के लिए पूर्वी देशो के साथ व्यापार, आक्रमण और संधिया करने का अधिकार प्राप्त हुआ



    • 1605 ई. में डचों की पहली फैक्ट्री ‘मसुलीपट्टनम’ में स्थापित की थी
      व्यापार किए गए मसालों के साथ विनिमय के लिए वस्त्रों की तलाश कर रहे थे।

    • वस्त्रों के अलावा, डच भारत में कारोबार की जाने वाली वस्तुओं में भारतीय प्रायद्वीप में कीमती पत्थर, इंडिगो और रेशम, डच बंगाल में नमक और अफीम, और डच मालाबार में काली मिर्च शामिल हैं। भारतीय दासों को स्पाइस आइलैंड्स और केप कॉलोनी में आयात किया गया था।

    • 1690 तक डचों का मुख्यालय पुलीकट था बाद में नेगापट्टनम को मुख्यालय बनाया

    • इन्होंने अपनी फैक्ट्री पुलीकट (1610), सूरत (1610), बिमलीपट्टनम (1641), करिकल (1645), चिनसुरा (1653), कासिमबाजार, बाड़ानागोर, बालासोर, पटना नेगापट्टनम(1658), कोचीन (1663) में स्थापित की




1759 ई. में अंग्रेजों और डचों के मध्य बेदार के युद्ध में डचों की हार हुई और भारत में इनकी व्यापारिक गतिविधिया समाप्त हो गई
उन दिनों के दौरान जब डच भारत में व्यावसायिक रूप से सक्रिय थे। उन्होंने कोचीन, मसुलीपट्टम, नागपट्टम , पांडिचेरी और पुलिकट में कई सिक्कों का संचालन किया। सभी सिक्के स्थानीय सिक्कों पर अंकित किए गए थे।


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